रबी सीजन की शुरुआत हो चुकी है और किसान पूरी मेहनत से गेहूं, चना, सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई में लगे हैं। लेकिन इस बार किसानों को सबसे बड़ी परेशानी खाद की कमी से झेलनी पड़ रही है। खबर के मुताबिक, घड़साना और रावला तहसील में लगभग 80 हजार बैग DAP और 2 लाख बैग Urea की ज़रूरत है, जबकि अभी तक बाज़ार और सहकारी समितियों पर इनकी सप्लाई नहीं पहुंची है।
यह स्थिति न सिर्फ किसानों के लिए चिंता का विषय है बल्कि फसल उत्पादन पर भी सीधा असर डाल सकती है।
घड़साना और रावला में खाद की भारी मांग
13 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में स्टॉक खत्म
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र की 13 ग्राम सेवा सहकारी समितियों और एक क्रय विक्रय सहकारी समिति में DAP और Urea का एक भी बैग उपलब्ध नहीं है।
- DAP की आवश्यकता: करीब 80 हजार बैग
- Urea की आवश्यकता: लगभग 2 लाख बैग
किसानों की परेशानी

किसानों का कहना है कि बुवाई के शुरुआती समय में ही खाद की कमी गंभीर संकट बन सकती है। बिना खाद के गेहूं और चने की फसल की अंकुरण क्षमता कम हो जाएगी, जिससे पैदावार घट सकती है।
रबी फसलों पर प्रभाव
बुवाई के समय पर असर
रबी सीजन में समय पर खाद उपलब्ध न होने से फसल की बुवाई में देरी हो रही है। देरी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। गेहूं और चने जैसी फसलें समय पर खाद मिलने पर ही अधिक पैदावार देती हैं।
नहरी पानी की कमी से दोहरी मार
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नहरी पानी की कमी के कारण किसान पूरी तरह से खाद पर निर्भर हैं। ऐसे में DAP और Urea की कमी उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रही है।
सरकार और प्रशासन की ज़िम्मेदारी
वितरण व्यवस्था में तेजी की मांग
किसानों ने मांग की है कि खाद वितरण में तेजी लाई जाए। सहकारी समितियों पर तुरंत स्टॉक भेजा जाए ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके।
आपूर्ति बाधित होने के कारण
सूत्रों के अनुसार, फैक्ट्री से समय पर खाद की आपूर्ति न होने और ट्रांसपोर्टेशन में देरी इसकी मुख्य वजह है।
समाधान और सुझाव
सरकार की ओर से कदम
- खाद की सप्लाई के लिए स्पेशल ट्रेन या ट्रक सेवा शुरू की जाए।
- सहकारी समितियों को सीधे फैक्ट्री से खाद उपलब्ध कराई जाए।
किसानों के लिए सुझाव
- बुवाई से पहले वैकल्पिक जैविक खाद का इस्तेमाल करें।
- फसल की जरूरत के अनुसार खाद का संतुलित प्रयोग करें।
निष्कर्ष
रबी सीजन में DAP और Urea की कमी किसानों के लिए एक गंभीर संकट बन गई है। सरकार को तत्काल आपूर्ति बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की ज़रूरत है। समय पर खाद उपलब्ध न होने से किसानों की मेहनत पर असर पड़ेगा और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
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