सूर्य ग्रहण 2025 का महत्व
साल 2025 का यह Surya Grahan 2025 (Solar Eclipse 2025) खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से बेहद खास है। रविवार रात लगने वाला यह आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) 4.33 घंटे तक चलेगा, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा। नैनीताल स्थित एरीज (Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences – ARIES) के वरिष्ठ खगोल विज्ञानी डॉ. शशिभूषण पांडेय ने बताया कि यह ग्रहण रविवार रात लगभग 11 बजे शुरू होगा और सोमवार सुबह 3.33 बजे समाप्त होगा।
🌎 भारत में क्यों नहीं दिखेगा यह सूर्य ग्रहण?

खगोलीय कारण
- यह ग्रहण मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी भाग, न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका, प्रशांत और अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा।
- भारत इस ग्रहण की दृश्य सीमा से बाहर है, इसलिए यहां इसे नहीं देखा जा सकेगा।
- खगोल विज्ञान में इस प्रकार के आंशिक सूर्य ग्रहण का अध्ययन केवल पूर्वानुमान की पुष्टि के लिए किया जाता है।
वैज्ञानिक अध्ययन का महत्व
- पूर्ण Surya Grahan में वैज्ञानिक सूर्य के कोरोना का अध्ययन करते हैं।
- आंशिक सूर्य ग्रहण का अध्ययन केवल समय और गणना की सटीकता की पुष्टि के लिए किया जाता है।
समय और अवधि : Surya Grahan 2025 Timing
| घटना | भारतीय समय |
|---|---|
| ग्रहण की शुरुआत | रात 11:00 बजे (21 सितम्बर 2025) |
| ग्रहण की समाप्ति | सुबह 3:33 बजे (22 सितम्बर 2025) |
| कुल अवधि | 4 घंटे 33 मिनट |
अगला Surya Grahan भारत में कब दिखेगा?
डॉ. शशिभूषण पांडेय के अनुसार 2029 तक भारत से कोई भी Surya Grahan दिखाई नहीं देगा।
आने वाले ग्रहणों की सूची
- 17 फरवरी 2026: आंशिक सूर्य ग्रहण – भारत में नहीं दिखेगा।
- 12 अगस्त 2026: सूर्य ग्रहण – भारत में नहीं दिखेगा।
- 2 अगस्त 2027: सूर्य ग्रहण – भारतीय समयानुसार देर शाम, परंतु देखने की संभावना कम।
इसका मतलब है कि भारतीय खगोल प्रेमियों को सूर्य ग्रहण का अद्भुत नज़ारा देखने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना होगा।
दिल्ली–एनसीआर में दिखी रहस्यमयी रोशनी का राज़
आधी रात में चमकी रहस्यमय रोशनी
Surya Grahan से ठीक पहले शुक्रवार देर रात दिल्ली–एनसीआर में आकाश में कुछ सेकंड के लिए एक रहस्यमय चमकदार रोशनी देखी गई।
- कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए।
- यह घटना आधी रात के बाद घटी और सुबह तक इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी रही।
संभावित कारण
वैज्ञानिकों ने इसके कई संभावित कारण बताए हैं :
- उल्का पिंड या क्षुद्रग्रह (Asteroid/Meteor) का वायुमंडल से टकराना और जल जाना।
- पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे निष्क्रिय सैटेलाइट के टुकड़े का जलकर नष्ट होना।
- अंतरिक्ष में किसी सैटेलाइट मिशन के दौरान मलबे का गिरना।
हालांकि, अभी तक इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और वैज्ञानिक इसकी जांच कर रहे हैं।
सूर्य ग्रहण और वैज्ञानिक अध्ययन
Surya Grahan हमेशा से खगोलविदों के लिए ब्रह्मांड को समझने का बड़ा अवसर रहा है।
- पूर्ण Surya Grahan के समय सूर्य का बाहरी वायुमंडल (कोरोना) देखा और समझा जा सकता है।
- इससे सूर्य की ऊर्जा, तापमान और चुंबकीय तरंगों के रहस्यों को सुलझाने में मदद मिलती है।
- आंशिक ग्रहण में ऐसी गहन जानकारी नहीं मिलती, लेकिन समय पूर्वानुमान और अंतरिक्ष गणना की सटीकता की जांच की जाती है।
दुनियाभर में कहां देखा जाएगा Surya Grahan 2025
यह Surya Grahan मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों में दिखाई देगा :
- ऑस्ट्रेलिया का दक्षिणी भाग
- न्यूजीलैंड
- फिजी द्वीप
- अंटार्कटिका
- प्रशांत महासागर
- अटलांटिक महासागर
इन क्षेत्रों के खगोल विज्ञान केंद्रों ने विशेष टेलीस्कोप और अंतरिक्ष वेधशालाओं की मदद से इसे लाइव रिकॉर्ड करने की योजना बनाई है।
निष्कर्ष : 2025 का Surya Grahan – अद्भुत लेकिन भारत में अदृश्य
Surya Grahan 2025 वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, लेकिन भारतीय खगोल प्रेमियों को इसे देखने का मौका नहीं मिलेगा।
- यह 4.33 घंटे का आंशिक सूर्य ग्रहण होगा।
- 2029 तक भारत में कोई सूर्य ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिखेगा।
- दिल्ली–एनसीआर की रहस्यमयी रोशनी फिलहाल वैज्ञानिकों के लिए पहेली बनी हुई है।
यह खगोलीय घटना हमें याद दिलाती है कि अंतरिक्ष कितना विशाल और रहस्यमयी है। आने वाले वर्षों में जब भारत में अगला सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, वह खगोल विज्ञान के लिए और भी रोमांचक अवसर लेकर आएगा।
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