यूरिया की किल्लत: रावला–घड़साना में किसानों की बढ़ती परेशानी | Urea Shortage in Rawla Ghadsana

परिचय

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले का रावला–घड़साना क्षेत्र हर वर्ष सिंचाई, खाद, पानी प्रबंधन और फसल उत्पादन से जुड़ी बड़ी चुनौतियों का सामना करता है। इस साल स्थिति और भी गंभीर हो गई है, क्योंकि पानी आने के तुरंत बाद खेतों में कोर लगाने के लिए आवश्यक यूरिया (Urea) की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। किसान भाईयों के अनुसार, बाजार में एक भी बोरी उपलब्ध नहीं है, और जिनके घर पर थोड़ी-बहुत यूरिया Urea बची थी, वह भी कुल किसानों का मात्र 25% ही है।

Urea Shortage in Rawla Ghadsana
Urea Shortage in Rawla Ghadsana

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सिंचाई शुरू — पर यूरिया (Urea) कहां है?

14–15 नवंबर को पानी छोड़ा गया, पर खाद उपलब्ध नहीं

14 नवंबर की सुबह अनूपगढ़ शाखा से पानी छोड़ा गया और 15 नवंबर से रावला–घड़साना क्षेत्र के किसान सरसों और गेहूं में पानी लगाने में जुट गए। परंतु बड़ी समस्या यह है कि:

  • यूरिया (Urea) की एक भी बोरी बाजार में उपलब्ध नहीं
  • किसानों के घरों में भी केवल ¼ किसानों के पास सीमित स्टॉक बचा
  • जिन किसानों ने बुवाई पहले की थी, वे भी कोर लगाने के लिए खाद की तलाश में भटक रहे हैं

यह स्थिति आने वाले दिनों में फसल उत्पादन पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।


कमांड क्षेत्र और सिंचाई का बड़ा दायरा

अनूपगढ़ शाखा एवं संबंधित डिस्ट्रिब्यूटरीज़ से आने वाला पानी निम्नलिखित प्रमुख नहरों में पहुंचता है:

मुख्य नहरों का क्यूसेक अनुसार विवरण

  • PSD – 65 क्यूसेक
  • KND – 125 क्यूसेक
  • KPD – 52 क्यूसेक
  • DOL – 75 क्यूसेक
  • KLD – 45 क्यूसेक
  • KYD – 80 क्यूसेक
  • BD (365 हेड) – 128 क्यूसेक
  • Candy – 145 क्यूसेक
  • RJD – 120 क्यूसेक
  • DKD – 30 क्यूसेक

पेयजल व लोसेज का 6% निकालने के बाद कुल मिलाकर लगभग 60000 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र में पानी पहुँचता है।


इतने बड़े क्षेत्र में कितनी फसल और कितनी यूरिया (Urea) चाहिए?

फसली क्षेत्र का विस्तृत आकलन

  • सरसों – 45,000 हेक्टेयर
  • गेहूं – 9,000–10,000 हेक्टेयर
  • चना – 5,000–6,000 हेक्टेयर

चना कम यूरिया लेता है, इसलिए यदि इसे छोड़ दिया जाए तो 50,000–54,000 हेक्टेयर क्षेत्र में यूरिया की सीधी आवश्यकता बनती है।


कुल यूरिया (Urea) की मांग — आँकड़ों में

प्रति हेक्टेयर आवश्यकता

किसानों के अनुसार, कोर से लेकर दूसरे पानी तक प्रति हेक्टेयर लगभग 4 बोरी यूरिया चाहिए।

कुल मांग

  • 50,000 – 54,000 हेक्टेयर = 2 लाख बोरी यूरिया की आवश्यकता
  • यदि उड़ाई हुई मांग का 25% कम भी मान लिया जाए तब भी
    1 लाख – 1.5 लाख बोरी यूरिया तुरंत चाहिए

पर वास्तविकता यह है कि बाजार में 0 बोरी उपलब्ध है।


छोटे और बड़े किसानों पर अलग-अलग प्रभाव

छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

रावला–घड़साना क्षेत्र में अधिकांश किसान छोटे जोत वाले हैं, जिनकी कृषि भूमि 5–15 बीघा तक सीमित है। छोटे किसानों की समस्या:

  • पानी आने पर तुरंत खाद डालनी होती है
  • महंगा खाद ब्लैक में खरीदने की मजबूरी
  • 5 बोरी भी उपलब्ध नहीं
  • फसल खराब होने का भय
  • अतिरिक्त श्रम और ट्रैक्टर खर्च का नुकसान

बड़े किसान भी संकट में

बड़ी जोत वाले किसानों को इस समय 15–20 बोरी प्रति किसान आवश्यकता है।
अगर उपलब्धता न हो तो:

  • हजारों बीघा क्षेत्र में उत्पादन खतरे में
  • पानी-खाद का तालमेल बिगड़ना
  • अगले पानी तक फसल कमजोर पड़ना
  • कुल उत्पादन में भारी गिरावट

यूरिया (Urea) की कमी क्यों आई?

संभावित कारण

  • इस बार पानी समय पर आने के कारण सभी किसान एक साथ खेतों में सक्रिय हुए
  • सरकारी सप्लाई का लेट होना
  • रैक की कमी
  • डीलरों के पास स्टॉक न पहुँचना
  • सिंचित क्षेत्र अचानक बढ़ जाना
  • ट्रांसपोर्ट सप्लाई चेन में देरी

किसानों का दावा

भारतीय किसान संघ के सम्भाग सह मंत्री प्रेम देहड़ (रावला) का स्पष्ट कहना है—

“यदि अतिशीघ्र यूरिया (Urea) उपलब्ध नहीं हुआ,
तो किसान को मजबूर होकर पानी बिना खाद के ही लगाना पड़ेगा, जिससे भारी उत्पादन हानि होगी।”


किसानों का कृषि विभाग से आग्रह

किसानों ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. रावला और घड़साना के लिए तुरंत एक-एक रैक यानी 55,000 बोरी उपलब्ध करवाई जाए।
  2. डीलरों पर निगरानी बढ़ाई जाए ताकि कोई ब्लैक मार्केटिंग न हो।
  3. खाद वितरण में पारदर्शिता और टोकन सिस्टम लागू किया जाए।
  4. जिन किसानों की बारी अभी शुरू हो रही है, उन्हें पहले प्राथमिकता मिले।
  5. यूरिया की आपूर्ति 7–10 दिनों के अंदर सुनिश्चित की जाए।

किसानों ने चेताया है कि यदि समय पर खाद नहीं आई, तो इस साल फसल को भारी नुकसान होगा।


यूरिया (Urea) की कमी से संभावित नुकसान

1. फसल वृद्धि रूक जाएगी

सरसों और गेहूं की शुरुआती कोर में यूरिया की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। यदि अभी यूरिया नहीं मिली तो:

  • पौधे हरे नहीं होंगे
  • शाखाएं कम बनेंगी
  • दाना पतला होगा

2. उत्पादन में 30–40% तक गिरावट

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कोर के समय खाद न मिले तो सरसों में 40% और गेहूं में 30% तक उत्पादन कम हो सकता है।

3. आर्थिक नुकसान

  • छोटे किसानों का हजारों रुपये प्रति बीघा का नुकसान
  • बड़े किसानों का लाखों रुपये का नुकसान
  • सिंचाई, मजदूरी, डीजल — सब व्यर्थ

4. ब्लैक मार्केटिंग बढ़ने की संभावना

कमी के समय कई जगह यूरिया 50 किलो बोरी के 300–600 रुपये तक ज्यादा में बेचने की खबरें आती हैं।


समाधान क्या है?

सरकार और विभाग की त्वरित जिम्मेदारी

  1. रावला–घड़साना क्षेत्र में तुरंत दो रैक भेजे जाएँ
  2. खाद की आपूर्ति पर डीएसओ टीम की निगरानी
  3. किसानों को SMS अलर्ट के माध्यम से जानकारी
  4. पंचायत स्तर पर खाद वितरण शिविर
  5. यूरिया की ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्यवाही

किसानों को अस्थायी सुझाव

जिन किसानों के पास खाद नहीं पहुंची है, वे:

  • खेत में पहला हल्का पानी दे सकते हैं
  • जरूरी होने पर DAP + थोड़ी यूरिया का मिश्रण कर सकते हैं
  • कोर देर से भी डालनी पड़े तो अगले पानी से रिकवरी हो सकती है

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निष्कर्ष

रावला–घड़साना क्षेत्र में इस समय यूरिया (Urea) की किल्लत अत्यंत गंभीर स्थिति बन चुकी है।
सिंचाई शुरू हो चुकी है, फसलें पानी मांग रही हैं, और बाजार में यूरिया उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे समय में सरकार और कृषि विभाग का दायित्व है कि:

  • तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए
  • किसानों को राहत दी जाए
  • उत्पादन संकट को रोका जाए

यदि आने वाले एक सप्ताह के भीतर यूरिया की रैक नहीं पहुंची, तो इस बार हजारों किसानों को भारी आर्थिक और फसली नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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